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चोरी उद्दापन लूट डकैती section IPC Section 378 to 395
अर्थ जब कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति के कब्जे में से, उस व्यक्ति की सम्मति के बिना, कोई चल संपत्ति, बेईमानी पूर्ण आशय से हटाता है, तो वह चोरी कहलाता है |
उदाहरण 1] यामिनी के घर में उसकी मेज पर यामिनी की अंगूठी रखी थी और सुमन ने बेईमानी पूर्ण आशा से उसे हटा लिया, बिना यामिनी की सहमति के, तो यह चोरी होगा |
यदि वह कब्जाधारी को चोट का भय दिखाकर, उसको या किसी अन्य व्यक्ति को संपत्ति प्रदान करने के लिए विवश या उत्प्रेरित करें, तो वह उद्दापन का अपराध होगा |
प्रत्येक प्रकार की लूट में या तो चोरी या उद्दापन होता है……..
1. जब कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी व्यक्ति की
….. मृत्यु, या उपहति,या सदोष अवरोध
….. आसन्न मृत्यु, या आसन्न उपहति,या आसन्न सदोष अवरोध का भय
कारित करता है, या
कारित करने का प्रयत्न करता है…………. तो चोरी लूट होती है2. जब कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी व्यक्ति को
…….. तत्काल मृत्यु, या तत्काल उपहति,या तत्काल सदोष अवरोध के भय में डालकर उद्दापन कारित करता है,
………और जब उत्प्रेरित करता है तब भय में आकर व्यक्ति उसी समय और वहीं पर वह संपत्ति अभियुक्त को परिदत्त कर दे और
……… उद्दापन कारित करते समय अभियुक्त भय में डाले गए व्यक्ति के समक्ष हो…… तो उद्दापन लूट होगा |जब 5 या 5 से अधिक व्यक्ति मिलकर या तो लूट करते हैं या लूट करने का प्रयत्न करते हैं, तब लूट डकैती में बदल जाता है और डकैती का अपराध गठित हो जाता है
दंड का प्रावधान - चोरी के लिए दंड का प्रावधान भारतीय दंड संहिता की धारा 379 में किया गया है जबकि
उद्दापन के लिए दंड का प्रावधान भारतीय दंड संहिता की धारा 384 में किया गया है|लूट के लिए दंड का प्रावधान भारतीय दंड संहिता की धारा 392 में किया गया है |
डकैती के लिए दंड का प्रावधान भारतीय दंड संहिता की धारा 395 में किया गया है |Time Stamps
00:00 Introduction
00:36 theft
01:15 extortion
01:52 robbery
03:44 Dacoity
04:01 examples - https://youtu.be/COGAIXTE4NM
- English
- Law Learning Classes
theft extortion robbery dacoity ipc चोरी उद्दापन लूट डकैती section IPC Section 378 to 395
Author
Law Learning Classes
Video Category
Indian Penal Code
Language
english
Highlights
चोरी उद्दापन लूट डकैती section IPC Section 378 to 395
अर्थ जब कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति के कब्जे में से, उस व्यक्ति की सम्मति के बिना, कोई चल संपत्ति, बेईमानी पूर्ण आशय से हटाता है, तो वह चोरी कहलाता है |
उदाहरण 1] यामिनी के घर में उसकी मेज पर यामिनी की अंगूठी रखी थी और सुमन ने बेईमानी पूर्ण आशा से उसे हटा लिया, बिना यामिनी की सहमति के, तो यह चोरी होगा |
यदि वह कब्जाधारी को चोट का भय दिखाकर, उसको या किसी अन्य व्यक्ति को संपत्ति प्रदान करने के लिए विवश या उत्प्रेरित करें, तो वह उद्दापन का अपराध होगा |
प्रत्येक प्रकार की लूट में या तो चोरी या उद्दापन होता है……..
1. जब कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी व्यक्ति की
….. मृत्यु, या उपहति,या सदोष अवरोध
….. आसन्न मृत्यु, या आसन्न उपहति,या आसन्न सदोष अवरोध का भय
कारित करता है, या
कारित करने का प्रयत्न करता है…………. तो चोरी लूट होती है
2. जब कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी व्यक्ति को
…….. तत्काल मृत्यु, या तत्काल उपहति,या तत्काल सदोष अवरोध के भय में डालकर उद्दापन कारित करता है,
………और जब उत्प्रेरित करता है तब भय में आकर व्यक्ति उसी समय और वहीं पर वह संपत्ति अभियुक्त को परिदत्त कर दे और
……… उद्दापन कारित करते समय अभियुक्त भय में डाले गए व्यक्ति के समक्ष हो…… तो उद्दापन लूट होगा |
जब 5 या 5 से अधिक व्यक्ति मिलकर या तो लूट करते हैं या लूट करने का प्रयत्न करते हैं, तब लूट डकैती में बदल जाता है और डकैती का अपराध गठित हो जाता है
दंड का प्रावधान - चोरी के लिए दंड का प्रावधान भारतीय दंड संहिता की धारा 379 में किया गया है जबकि
उद्दापन के लिए दंड का प्रावधान भारतीय दंड संहिता की धारा 384 में किया गया है|
लूट के लिए दंड का प्रावधान भारतीय दंड संहिता की धारा 392 में किया गया है |
डकैती के लिए दंड का प्रावधान भारतीय दंड संहिता की धारा 395 में किया गया है |
Time Stamps
00:00 Introduction
00:36 theft
01:15 extortion
01:52 robbery
03:44 Dacoity
04:01 examples
अर्थ जब कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति के कब्जे में से, उस व्यक्ति की सम्मति के बिना, कोई चल संपत्ति, बेईमानी पूर्ण आशय से हटाता है, तो वह चोरी कहलाता है |
उदाहरण 1] यामिनी के घर में उसकी मेज पर यामिनी की अंगूठी रखी थी और सुमन ने बेईमानी पूर्ण आशा से उसे हटा लिया, बिना यामिनी की सहमति के, तो यह चोरी होगा |
यदि वह कब्जाधारी को चोट का भय दिखाकर, उसको या किसी अन्य व्यक्ति को संपत्ति प्रदान करने के लिए विवश या उत्प्रेरित करें, तो वह उद्दापन का अपराध होगा |
प्रत्येक प्रकार की लूट में या तो चोरी या उद्दापन होता है……..
1. जब कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी व्यक्ति की
….. मृत्यु, या उपहति,या सदोष अवरोध
….. आसन्न मृत्यु, या आसन्न उपहति,या आसन्न सदोष अवरोध का भय
कारित करता है, या
कारित करने का प्रयत्न करता है…………. तो चोरी लूट होती है
2. जब कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी व्यक्ति को
…….. तत्काल मृत्यु, या तत्काल उपहति,या तत्काल सदोष अवरोध के भय में डालकर उद्दापन कारित करता है,
………और जब उत्प्रेरित करता है तब भय में आकर व्यक्ति उसी समय और वहीं पर वह संपत्ति अभियुक्त को परिदत्त कर दे और
……… उद्दापन कारित करते समय अभियुक्त भय में डाले गए व्यक्ति के समक्ष हो…… तो उद्दापन लूट होगा |
जब 5 या 5 से अधिक व्यक्ति मिलकर या तो लूट करते हैं या लूट करने का प्रयत्न करते हैं, तब लूट डकैती में बदल जाता है और डकैती का अपराध गठित हो जाता है
दंड का प्रावधान - चोरी के लिए दंड का प्रावधान भारतीय दंड संहिता की धारा 379 में किया गया है जबकि
उद्दापन के लिए दंड का प्रावधान भारतीय दंड संहिता की धारा 384 में किया गया है|
लूट के लिए दंड का प्रावधान भारतीय दंड संहिता की धारा 392 में किया गया है |
डकैती के लिए दंड का प्रावधान भारतीय दंड संहिता की धारा 395 में किया गया है |
Time Stamps
00:00 Introduction
00:36 theft
01:15 extortion
01:52 robbery
03:44 Dacoity
04:01 examples
